आजादी के संग्राम की महान हस्तियों की याद मिटाने के काम को सुधारने का प्रयास: मोदी

नई दिल्ली। हमारे देश का यह दुर्भाग्य रहा है कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ कई महान हस्तियों की याद को मिटाने का काम किया गया। उनके इतिहास को सीमित करने की कोशिश की गयी। आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधारने का कार्य कर रहा है।
यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मां के वीर सपूत नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती के अवसर पर इंडिया गेट पर नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करते हुए कही। उन्होंने कहा कि नेताजी ने बड़े गर्व, आत्मविश्वास और साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा। मैं इसे हासिल करुंगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आजाद सरकार को स्थापित किया, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्दी ही होलोग्राम की जगह ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी। नेताजी की यह प्रतिमा हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी। श्री मोदी ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों के विकास का काम देश में जनभागीदारी से हो रहा है। सरदार पटेल की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को हमनें देशवासियों को समर्पित किया है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हमने कर दी है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 2019 से लेकर 2022 तक के लिए सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि नेताजी बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को देश पूरे गौरव से संजो रहा है। अंडमान में तिरंगा लहराने की घटना के 75वें वर्ष पर वहां एक द्वीप का नाम नेताजी के नाम पर रखा गया है। इस बार नेताजी के साथ इंडियन नेशनल आर्मी के साथ एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। नेताजी बोस कुछ ठान लेते थे, तो उन्हें कोई ताकत नहीं रोक सकती थी। हमें नेताजी की कैन डू, विल डू के मंत्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें उनकी इस बात से प्रेरणा लेनी चाहिए कि हमें राष्ट्रवाद को जिंदा रखना है। हम मिलकर नेताजी बोस के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे।

हर साल मनाया जाता है ‘पराक्रम दिवस’

पीएमओ के मुताबिक, पहले ही यह घोषणा की जा चुकी है कि हर साल नेताजी की जयंती ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी। इसी उत्कृष्ट भावना को ध्यान में रखते हुए गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत एक दिन पहले यानी 23 जनवरी से की जाएगी।

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