धनतेरस का महत्व, पूजा विधि और पूजन का शुभ मुहूर्त

पांच दिवसीय दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस का त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर, धन्वंतरि जी और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। इस दिन सोने-चांदी और घर के लिए बर्तन खरीदने की भी परंपरा है।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस का त्योहार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस तिथि की शुरुआत 2 नवंबर को 11.31 AM से होगी और समाप्ति 3 नवंबर को 09:02 AM पर। प्रदोष काल शाम 05:35 से रात 08:11 बजे तक रहेगा। धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम 06:17 PM से रात 08:11 PM तक रहेगा। यम दीपम का समय शाम 05:35 PM से 06:53 PM तक रहेगा।

धनतेरस पूजा विधि

 धनतेरस पूजा के समय भगवान सूर्य, भगवान गणेश, माता दुर्गा, भगवान शिव, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि जी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरि की षोडशोपचार पूजा करें। भगवान धन्वंतरि को गंध, अबीर, गुलाल, पुष्प, रोली, अक्षत आदि चढ़ाएं। उनके मंत्रों का जाप करें। उन्हें खीर का भोग लगाएं। भगवान धन्वंतरि को श्रीफल व दक्षिणा चढ़ाएं। पूजा के अंत में कर्पूर से आरती करें। फिर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। एक दीपक यम देवता के नाम का जलाएं।

भगवान धन्वंतरि की आरती
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन्वं.।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन्वं.।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन्वं.।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन्वं.।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन्वं.।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।जय धन्वं.।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन्वं.।।

धनतेरस के दिन की परंपरा:
धनतेरस के दिन पीतल, चांदी, स्टील के बर्तन खरीदने की परंपरा है। मान्यता है इस दिन बर्तन खरीदने से धन समृद्धि आती है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीपक जलाये जाते हैं। क्योंकि इस दिन से दीपावली के त्योहार की शुरुआत हो जाती है। धनतेरस पर शाम के समय एक दीपक यम देवता के नाम पर भी जलाया जाता है। मान्यता है ऐसा करने से यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से सुरक्षा करते हैं।

धनतेरस पर क्या खरीदें

इस दिन नई चीजें जैसे सोना, चांदी, पीतल खरीदना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन धनिया और झाड़ू खरीदना भी शुभ होता है।

राशियों के अनुसार खरीदारी शुभ

मेष – चांदी की कटोरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, स्वर्णाभूषण।

वृष – कपड़े, कलश।

मिथुन – सोने के आभूषण, स्टील के बर्तन।

कर्क – चांदी के आभूषण या बर्तन, घरेलू सामान।

सिंह – तांबे के बर्तन या कलश, लाल रंग के कपड़े।

कन्या – सोने या चांदी के आभूषण या कलश।

तुला – कपड़े, सौंदर्य सामान या सजावटी सामान।

वृश्चिक – इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सोने के आभूषण।

धनु – सोने के आभूषण, तांबे के बर्तन,मिट्टी के कलश।

मकर – वस्त्रत्त्, वाहन, चांदी के बर्तन या आभूषण।

कुम्भ – सौंदर्य के सामान, स्वर्ण ,तांबे के बर्तन।

मीन – सोने के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।

धनतेरस पर सुबह 8 से 10 बजे के बीच खरीदारी के लिए अधिक उपयुक्‍त

वैसे तो धनतेरस का पूरा दिन शुभ होता है। इस बार धनतेरस के दिन सुबह 8 से 10 बजे के बीच खरीदारी के लिए शुभ समय होगा। इसमें स्थिर लग्न (वृश्चिक) उपस्थित रहेगी, दूसरा शुभ मुहूर्त सुबह 10:40 से दोपहर 1:30 के बीच होगा। इस समय लाभ और अमृत के शुभ चौघड़िया मुहूर्त उपस्थित रहेंगे। दोपहर 1:50 से 3 बजे के बीच भी खरीदारी के लिए स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त होगा। शाम 6:30 से रात 8:30 के बीच स्थिर लग्न का शुभ मुहूर्त रहेगा।

धनतेरस पर न करें इन चीजों की खरीददारी

धनतेरस पर सोने-चांदी और पीतल की चीजों को खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। लेकिन इस दिन कुछ विशेष चीजों की खरीददारी नहीं करनी चाहिए। मान्यता है कि इससे धन की हानि होती है। धनतेरस पर प्लास्टिक, एलुमिनियम की चीजें न खरीदें। नुकीली चीजों की खरीददारी से भी इस दिन बचना चाहिए।

धनतेरस पर मां लक्ष्मी पूजन विधि

लाल कपड़ा बिछाकर मुट्ठी भर अनाज रखें| अनाज पर कलश स्थापित करें|कलश में तीन चौथाई पानी भरकर थोड़ा सा गंगाजल मिला लें| फिर इसमें फूल, अक्षत, सिक्का और सुपारी डालें| ऊपर पांच आम के पत्ते लगाएं. इनके ऊपर धातु के बर्तन में धान भरकर रखें|धान पर हल्दी से कमल फूल बनाएं और मां लक्ष्मी को बैठाकर आगे कुछ सिक्के रख दें| कलश के सामने दक्षिण-पूर्व दिशा में दाईं ओर गणेशजी की मूर्ति रखें| पूजा शुरू करते हुए पानी हल्‍दी और कुमकुम अर्पित कर नीचे दिए गए मंत्र का उच्‍चारण करें-

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलिए प्रसीद-प्रसीद

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मिये नम:

हाथों में फूल ले आंख बंद करें, मां लक्ष्‍मी का ध्‍यान कर फूल चढ़ाए| गहरे बर्तन या थाली में लक्ष्‍मी प्रतिमा को पंचामृत से स्‍नान कराएं| इसके बाद पानी में आभूषण या मोती डालकर स्‍नान कराएं| प्रतिमा को पोंछकर कलश के ऊपर बर्तन में रख दें| चाहें तो सिर्फ पंचामृत और पानी छिड़ककर भी स्‍नान करा सकते हैं| अब मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा को चंदन, केसर, इत्र, हल्‍दी, कुमकुम, अबीर और गुलाल अर्पित करें| मां की प्रतिमा पर फूलों का हार चढ़ाएं. बेल पत्र और, गेंदा फूल अर्पित कर धूप जलाएं| अब मिठाई, नारियल, फल, खीले-बताशे अर्पित करें| प्रतिमा पर धनिया और जीरे के बीज छिड़कें| आप घर में जिस जगह पैसे, जेवर रखते हैं वहां पूजा कर मां लक्ष्‍मी का एकाग्र ध्यान करते हुए आरती उतार लें|

धनतेरस पूजा सामग्री

कपूर, केसर, कुमकुम, चावल, अबीर, गुलाल, अभ्रक, हल्दी, सौभाग्य द्रव्य, मेहंदी, चूड़ी, काजल, पायजेब, बिछुड़ी, नाड़ा, रुई, रोली, सिंदूर, सुपारी, पान पत्ता, पुष्पमाला, कमलगट्टे, धनिया खड़ा, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, कुशा, दूर्वा, पंच मेवा, गंगाजल, शहद, शकर, घृत, दही, दूध, ऋतुफल, नैवेद्य या मिष्ठान्न, मालपुए इत्यादि), इलायची (छोटी), लौंग, मौली, इत्र शीशी, तुलसी दल, सिंहासन, पंच पल्लव, औषधि, लक्ष्मीजी का पाना, गणेश मूर्ति, सरस्वतीजी चित्र, चांदी सिक्का, लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र, अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र, जल कलश (तांबे या मिट्टी का), सफेद कपड़ा (आधा मीटर), लाल कपड़ा, पंच रत्न, दीपक, बड़े दीपक के लिए तेल, ताम्बूल, श्रीफल (नारियल), धान्य, लेखनी (कलम), बही-खाता, स्याही की दवात, तुला (तराजू), पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल), एक नई थैली में हल्दी की गांठ, खड़ा धनिया, दूर्वा आदि, खील-बताशे, अर्घ्य पात्र.

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