भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का पर्व है हरियाली तीज

इंदौर। हिंदू पंचांग के अनुसार 11 अगस्त को हरियाली तीज व्रत रखा जाएगा। ये व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। ये पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस त्योहार को भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

हरियाली तीज पर परंपरा
-हरियाली तीज के मौके पर लड़कियों को ससुराल से पीहर बुला लिया जाता है।
-हरियाली तीज से एक दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है। इस दिन नई शादीशुदा लड़कियों के ससुराल से कपड़े, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, आभूषण और मिठाई मायके में आती हैं।
-इस दिन महिलाएं मेहंदी लगाती हैं। पैरों में आलता लगाती हैं।
-हरियाली तीज रखने वाली स्त्रियां इस दिन सांस के पांव छूकर उन्हें सुहागी देती हैं। जिनकी सांस नहीं होती वो या तो जेठानी को या फिर अन्य किसी वृद्ध महिला को सुहागी देती हैं।
-इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहन अच्छे से श्रृंगार कर तैयार होती हैं और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
-कई जगह इस दिन महिलाएं झूले भी झूलती हैं और लोक गीत गाकर नाचती गाती हैं।

हरियाली तीज पूजा विधि
-इस दिन व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संभव हो तो हरे रंग के वस्त्र पहनें।
-घर की साफ-सफाई कर मंडप को तोरण से सजाएं।
-मंदिर के सामने चौकी पर मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, माता पार्वती और उनकी सखियों समेत गणेश जी की भी प्रतिमा बनाएं।
-इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए उनकी पूजा करें।
-इस दिन महिलाएं रात भर जागरण करती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के गीत गाती हैं।
-हरियाली तील की कथा सुनती हैं।

हरियाली तीज पूजा मुहूर्त

हरियाली तीज की शुरुआत 10 अगस्त को शाम 6 बजकर 5 मिनट से हो जाएगी और इसकी समाप्ति 11 अगस्त को शाम 4 बजकर 53 मिनट पर होगी। हरियाली तीज व्रत 11 अगस्त को रखा जाएगा।

हरियाली तीज व्रत का महत्व

 ये त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। पौराणिक कथा अनुसार माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए सालों कठोर तप किया। इस कड़ी तपस्या और 108वें जन्म के बाद माता भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए इस दिन महिलाएं माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने सुखी वैवाहिक जीवन की उनसें कामना करती हैं।

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