डॉक्टर्स की नेतृत्व,प्रबंधन क्षमता का विकास करेगा आईआईएम इंदौर का ‘कृतज्ञ’


इंदौर | कोरोना काल में प्रथम पंक्ति के योद्धा डॉक्टरों के लिए आईआईएम इंदौर का लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम ‘कृतज्ञ’ 31 जुलाई, 2021 को ऑनलाइन मोड़ में प्रारंभ हुआ। सत्तर घंटे के इस ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. हिमाँशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर ने किया। इस मौके पर प्रो. सुबीन सुधीर, चेयर, एग्जीक्यूटिव एजुकेशन; प्रो. दिपायन दत्ता चौधरी, डीन-प्लानिंग एंड डेवलपमेंट और सभी चयनित 100 डॉक्टर आभासी रूप से उपस्थित रहे। यह पाठ्यक्रम डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए संस्थान की एक पहल है और इसलिए, अपनी संस्थागत सामाजिक जिम्मेदारी के एक हिस्से के रूप में, यह प्रोग्राम इन चयनित डॉक्टरों के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा और इसकी पूरी लागत संस्थान द्वारा वहन की जाएगी। यह अनुमानित लागत 1.5 करोड़ रूपए है, अतः यह किसी भी शैक्षणिक संस्थान द्वारा संस्थागत सामाजिक ज़िम्मेदारी के तहत किए गए योगदान में सबसे अधिक राशि है।

प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम डॉक्टरों को उनके नेतृत्व कौशल को बढ़ाने में मदद करेगा

प्रो. हिमाँशु राय ने अपने उद्घाटन भाषण में डॉक्टरों के साथ ‘FIRE’ के महत्व को साझा किया – Follow your heart / अपने दिल की सुनें, Invest in relationships / रिश्तों को मजबूत बनाएं, Redefine Success / सफलता की नयी परिभाषा बनाएं, और Empathy / सभी से सहानुभूति रखें। उन्होंने कहा कि सफल नेतृत्व सदा सीखते रहने में है, और सीखना और ज्ञानार्जन एकतरफा प्रक्रिया नहीं है। ‘हमेशा अपने मन की सुनें। खुले दिमाग और दिल से हर नए व्यक्ति से मिलें, क्योंकि हर कोई आपको कुछ न कुछ सिखा सकता है। यदि आप इस भ्रम में रहेंगे कि आप सब कुछ जानते हैं, तो आप कभी भी कुछ नया
नहीं सीख पाएंगे, और इससे आपके सम्बन्ध भी प्रगाढ़ होंगे’, उन्होंने कहा। जीत और उपलब्धियों पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने कहा, कि जीवन केवल मंजिलें या लक्ष्य प्राप्त करने पर आधारित नहीं है, बल्कि सफलता एक यात्रा है, जो आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचती है। ‘हमें सफलता को फिर से परिभाषित करने और यह महसूस करने की जरूरत है, और यह समझने की, कि यह हमारे पदनाम या गंतव्य अथवा मंजिलों पर  आधारित नहीं है’। उन्होंने डॉक्टरों को सलाह दी कि वे अपनी क्षमता के अनुसार काम करें और उन लोगों की मदद करने का हरसंभव प्रयास करें जो ज़रूरतमंद हैं और जिन्हें हमारे जैसी सुविधाएं, साधन और विशेषाधिकार प्राप्त नहीं हैं। ‘सहानुभूति मात्र दूसरे के दुःख सुनने से नहीं, बल्कि सामने वाले की समस्याएं सुन कर उनका समाधान खोजने में है’, उन्होंने कहा। प्रो. सुबीन सुधीर और प्रो. दिपायन दत्ता चौधरी ने डॉक्टरों का स्वागत किया और उन्हें कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने उल्लेख किया कि यह निःशुल्क प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम डॉक्टरों को उनके नेतृत्व कौशल को बढ़ाने में मदद करेगा, और इसमें नेतृत्व, नए जमाने की प्रौद्योगिकी, सेवा संचालन, वित्तीय प्रबंधन, बातचीत, संघर्ष प्रबंधन, प्रभावी संचार कौशल सहित डॉक्टरों के लिए रुचि के समकालीन विषय शामिल होंगे । कार्यक्रम के लिए देश भर से आवेदन करने वाले 500 डॉक्टरों में से, आईआईएम इंदौर पैनल ने शीर्ष 100 का चयन किया है। ये मध्य प्रदेश, झारखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब, असम, बिहार, तेलंगाना, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार, सहित 22 राज्यों के 50 से अधिक शहरों से हैं। 27-65 वर्ष की आयु के ये डॉक्टर 30 से अधिक विशेषज्ञताओं से संबंधित हैं, जैसे सामान्य सर्जरी, एनेस्थीसिया, आर्थोपेडिक और ट्रॉमा, आंतरिक चिकित्सा, पैथोलॉजी, बाल रोग, विकिरण ऑन्कोलॉजी, प्लास्टिक, पुनर्निर्माण और सौंदर्य सर्जरी, शरीर विज्ञान, शरीर रचना विज्ञान, कैंसर सर्जरी, कार्डियोलॉजी , विमानन चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नेत्र  विज्ञान, नेफ्रोलॉजी, सार्वजनिक स्वास्थ्य, आदि। डॉक्टरों के लिए सुविधाजनक समय पर कक्षाएं शनिवार और रविवार को ऑनलाइन आयोजित की जाएँगी।

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