माँ व बच्चे के बीच आत्मीयता विकसित करता है स्तनपान

निशिकांत मंडलोई

बच्चे के स्वस्थ जीवन के लिए माँ का दूध अमृतपान के समान होता है। स्तनपान माँ एवं शिशु का विशेषाधिकार है। स्तनपान से माँ व बच्चे की बीच आत्मीयता विकसित होती है लेकिन आज कई माताएं फैशन के चक्कर में बच्चे को बोतल का दूध पिलाना अधिक पसंद करती हैं। इससे शिशु को आवश्यक पोषक तत्व जो उसे मिलने चाहिए उससे वह वंचित हो जाता है। हमें
यह तो मानना ही पड़ेगा कि माँ का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम और सम्पूर्ण आहार है। यह एक विडम्बना ही कही जाएगी कि वर्तमान परिवेश में बच्चे को स्तनपान से महरूम रखने की परंपरा सी हो गई है। इस परंपरा को जारी रखने और इसके फायदे क्या है यही बताने के लिए सरकारी स्तर पर 1 से 7 अगस्त तक स्तनपान सप्ताह आयोजित किया जाता है। 1 अगस्त को मित्रता दिवस पर सभी ने एक दूसरे को याद किया लेकिन स्तनपान पर कोई चर्चा का ना होना दुखद था।

माँ का दूध सर्वोत्तम

माँ का दूध प्रकृति की सबसे बड़ी देन है। बच्चे के लिए उसके जन्म से लेकर चार महीने तक माँ के दूध के अलावा ऊपर से कोई आहार देने की आवश्यकता नहीं है। प्रारम्भ के तीन चार दिन तक दूध गाढ़ा व पीले रंग का होता है इसमे कोलोस्ट्रोम होता है जिसमे रोग प्रतिरोधक तत्व कई रोगों से बचाते हैं। कुछ माताएं भ्रामक धारणाओं के कारण शुरू के एक दो दिन शिशु को अपना दूध ना पिलाकर शहद, चीनी,गुड़ या ग्लूकोज का पानी और घुट्टी पिलाती हैं यह उचित नहीं है ।आधुनिक माताएं शारीरिक आकृति में विकृति ना हो इस कारण शिशु के साथ खिलवाड़ कर देती है। प्राचीन भारतीय मान्यता के अनुसार अधिक समय तक माँ के दूध के सेवन से बच्चे के शरीर के विभिन्न अवयवों का विकास तो होता ही है साथ ही अधिक समय तक निरोगी जीवित रह सकते हैं।

रोग निरोधक भी
माँ के दूध की संरचना के मुकाबले डिब्बे का कृत्रिम दूध निष्क्रिय तथा निर्धारित व निश्चित अनुपात के तत्वों का बना होता है।
चिकित्सा जगत के पोषण विशेषज्ञों के अनुसार एक स्वस्थ माँ द्वारा प्रतिदिन 850 मिलीलीटर दूध उत्पन्न होता है। इसमें प्रति 100 मिलीलीटर दूध में 1.2 ग्राम प्रोटीन,20.5 मिलीग्राम कैल्शियम,0.75 मिलीग्राम लोहा, 300 माइक्रोग्राम विटामिन ए, 15.30 मिलीग्राम एस्कार्बिक फोलिक एसिड तथा 0.14 माइक्रोग्राम विटामिन बी-12 के रूप में पोषक तत्व होते हैं। मुख्यरूप से माँ के दूध की संरचना में 78 प्रतिशत पानी, 10.1 प्रोटीन, 3.8 प्रतिशत वसा, 0.2 प्रतिशत खनिज होता है। इस प्रकार माँ के दूध में मौजूद रासायनिक पदार्थो से अनेक बीमारियों से बचाव होता है।
बोतल से दूध पिलाने के खतरे
बोतल से दूध पान कराने से बच्चे की मृत्यु का खतरा 14 गुना बढ़ जाता है। इसके साथ ही अन्य बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है। एक माह से कम तक स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन कैंसर का खतरा अधिक होता है। बोतल पान करने वाले बच्चों में डायरिया,,श्वसन संबंधी संक्रमण, कर्णव मस्तिष्क शोथ के साथ ही बच्चों में लिम्फोमा, जिरोप्लेथेलमिया(दृष्टि विकार) की संभावना बढ़ जाती है।
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कैसे बढ़े दूध की मात्रा
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महिलाओं में दूध की कमी दो प्रकार की होती है।एक वास्तविक व दूसरी आभाषी। स्तनों में दूध आने की क्रिया दो प्रकार से होती है। एक क्रिया ,, ऑक्सीटोसीन रिफ्लेक्स,, कहलाती है, जिसमें स्वतः ही दूध प्रवाहित होने लगता है। यह मुख्यतः मानसिक व भावनात्मक होती है। दूसरी क्रिया ,, प्रोलेक्टीन रिफ्लेक्स आक्सीटोसिन,, कहलाती है। इस प्रक्रिया में दूध का स्राव हार्मोन प्रोलेक्टीन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होता है। फूड पिलाने वाली माताओं को एक सामान्य स्त्री की तुलना में एक हजार कैलोरी की अतिरिक्त आवश्यकता होती है। अतः ऐसी माताओं के आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ हों, जो पोष्टिक के साथ ही कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिनों से परिपूर्ण हो।
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क्या तरीका हो
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सही मात्रा और तरीके से कराया गया स्तनपान शिशु के स्वस्थ विकास में सहायक होता है। एक बार में 10-15 मिनट तक दूध पीने पर बच्चा लगभग 2 घंटे तक दयध कि मांग नहीं करता। इसके लिए जरूरी है कि स्तनपान कराते समय बैठकर शिशु को बारी बारी से दोनों स्तनों से दूध पिलाना चाहिए। दूध पीते समय शिशु का सिर हाथ से ऊपर रखना चाहिए। स्तनपान के बाद प्रत्येक बार शिशु को कंधे से लगाकर पीठ थपथपाना चाहिए ताकि स्तनपान करते समय जो हवा अंदर चली जाती है वह डकार के माध्यम से निकल सके।

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