गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल

भारत की पावन भूमि पर गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊपर रखा गया है। इसीलिए तो कबीरदास जी ने भी कहा है
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपकी, गोविंद दियो बताय।।
इसी भावना वाली भारत भूमि पर 6 जुलाई 2020 को कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में उपस्थित जनसमुदाय ने गुरु-शिष्य परंपरा का एक ऐसा दृष्य देखा, जिसे वो ताउम्र याद रखना चाहेंगे।
6 जुलाई 2020 को भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस संस्थान में गुरुजनों के सम्मान समारोह में आए थे। महामहिम अपने गुरुओं को देखकर भावविभोर हो गए। यहां पर उन्होंने अपने पूर्व शिक्षक प्यारेलाल, हरि राम कपूर, टीएन टंडन को सम्मानित किया। वे उनका आशीर्वाद लेने के लिए इतने आतुर दिखे कि उन्हें प्रोटोकॉल का भी ध्यान नहीं रहा। दो गुरुजनों से मंच पर ही पैर छूकर आशीर्वाद लिया। पूर्व शिक्षक प्यारेलाल वर्मा जिनकी उम्र 100 वर्ष हो चुकी है को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति स्वयं मंच से नीचे उतरकर उनके पास पहुंचे। पहले उन्होंने प्यारेलाल जी के पैर छुए और पूछा, “गुरु जी आप मुझे भूले तो नहीं हैं।“’ इसके बाद उनका सम्मान किया।

गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करने वाले इस दृश्य को देखकर मन में यही भाव आता है कि भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने अपने विद्यालय के गुरुओं के जिस आस्था से पैर छुए हैं वो अनुरकणीय है। महामहिम ने सभी को संदेश दिया है कि इंसान कभी पद से बड़ा नहीं होता। इंसान हमेशा अपने आचरण व संस्कार से बड़ा होता है। हम तो यही कहेंगे की यह प्रसंग हर विद्यार्थी के लिये प्रेरक, स्मरणीय और अनुकरणीय है|

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