घर-आँगन के 9 औषधीय पौधे, रोग से दिलाये निजात

आज हम आपको ऐसे 9 औषधीय पौधों के बारे में बता रहे हैं जो हम अपने घर में ही उगा कर अनेक रोगों से निजात पा सकते हैं। मान्यता है कि इन 9 औषधियों में मां अम्बे अपने नौ रूप में विराजित हैं, जो समस्त रोगों से बचाकर जगत का कल्याण करती हैं। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गा कवच कहा गया है। तो आइये चर्चा करते हैं दिव्य गुणों वाली 9 औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है –
पहला औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है हरड़। कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है। यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है।

Haran (Cast-iron plant) | Haran (Cast-iron plant) | Flickr

दूसरी औषधीय पौधा है ब्राह्मी। यह नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है।

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धनिए के समान दिखने वाला औषधीय पौधा चंदुसूर मोटापा दूर करता है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं। मां दुर्गा के तीसरे रूप चंद्रघंटा का प्रतिनिधित्व करने वाले इस पौधे की पत्तियों की सब्जी भी बनाई जाती है। इसका नियमित सेवन न केवल हमारी शक्ति बढ़ाता है और हमारे हृदय को भी स्वस्थ रखता है।

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मां नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रोगों में यह अमृत समान है। कुम्हड़ा पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। हृदय रोग के उपचार में यह कारगर औषधि है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है।

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आपको जानकर आष्चर्य होगा कि हमारे घर में मौजूद अलसी नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है, जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। अलसी के नियमित सेवन से वात, पित्त और कफ से संबंधित रोगों का जड़ से नाष होता है।

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मोइया औषधीय पौधा मां नवदुर्गा का छठवां स्वरूप माना जाता है। इसे आयुर्वेद में अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका नाम से भी जाना जाता है। यह औषधि कफ, पित्त, अति विकार और गले के रोगों का नाश करती है।

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नागदौन औषधि को मां दुर्गा के सातवें रूप कालरात्रि का प्रतीक माना जाता है। यह औषधि सभी प्रकार के रोगों की नाशक और मन-मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को घर में लगाने से घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस औषधि में विषों का नाश करने का भी गुण होता है।

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हमारे घर में मौजूद औषधीय पौधा तुलसी मां दुर्गा के अष्टम रूप महागौरी का प्रतीक माना जाता है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। तुलसी में हमारे रक्त को साफ करने का गुण मौजूद है। प्रतिदिन तुलसी के सेवन से हम हृदय रोग को दूर रख सकते हैं।

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औषधीय पौधे षतावरी को माता दुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री का प्रतीक माना जाता है। देवी के इस रूप को नारायणी या शतावरी भी कहते हैं। शतावरी बुद्धि, बल और वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है।
तो दोस्तों देखा आपने हम अपने घरों में इन 9 पौधों को रखकर हर एक बीमारी का उपचार कर सकते है। ये औषधीय पौधे रक्त संचालन को सुधार कर हमारी षक्ति को बढ़ाते हैं।

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